Wednesday, June 8, 2011

गाँधी और भगत सिंह की फ़ाँसी


अंग्रेज सरकार अपनी कोइ भी बात गाँधी से गुप्त नही रखती थी । उसकी लडाई गाँधी से नहीं, भारत की जनता से थी ।

इर्विन से समझौते की बातचीत के दौरान गाँधी ने भगत सिंह और उनके साथियों को फ़ाँसी से बचाने के लिये क्या प्रयत्न किये, इस बारे में बहुत सी अफ़वाहें फ़ैली हुई हैं । लेकिन राष्ट्रीय लेखागार की फ़ाइलों से कुछ नये तथ्य प्रकाश में आये हैं, जिन्हे मन्मथनाथ गुप्त ने ‘नवनीत’ में प्रकशित अपने लेख में उद्धृत किया है । इर्विन ने अपने रोजनामचे में लिखा है –
“दिल्ली मे जो समझौता हुआ, उससे अलग और अन्त में मिस्टर गाँधी ने भगत सिंह का उल्लेख किया, उन्होंने फ़ाँसी की सजा रद्द करने के लिये कोइ पैरवी नही की, साथ ही उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों में फ़ाँसी को स्थगित करने के बिषय में भी कुछ नही कहा ।” (फ़ाइल नं 5-45/1931 KW-2 गृहविभाग राजनीतिक शाखा)
20 मार्च को गाँधी वायसराय के गृह-सदस्य हर्बर्ट इमरसन से मिला । इमरसन ने भी रोजनामचे में लिखा है –
“मिस्टर गाँधी की इस मामले में अधिक दिलचस्पी नही मालुम हुई । मैने उनसे यह कहा कि वह सबकुछ करें ताकि अगले दिनों में सभाएँ न हों और लोगो के उग्र व्याख्यानों को रोकें । इस पर उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी और कहा जो कुछ भी मुझसे हो सकेगा मैं करुँगा ।” (फ़ाइल नं 33-1/1931)
क्या अर्थ हो सकता है इसका, इस बात के अतिरिक्त कि गाँधी ने स्वयं अपरोक्ष रूप में ब्रिटिश सरकार का सहयोग किया, हमारे महान क्रान्तिकारी भगत सिंह और उनके साथियों को फ़ाँसी दिलाने में । अगर गाँधी चाहते तो शायद भगत सिंह और उनके साथियों को फ़ाँसी न हुई होती । मगर उसने फ़ाँसी रोकने के लिये प्रयत्न करना तो दूर, स्थिति को सरकार के अनुकूल बनाए रखने में ब्रिटिश सरकार का सहयोग किया ।

9 comments:

  1. यदि ऐसा हो जाता तो गांधी आज गांधी नहीं कहलाते ?

    पुरी दुनिया मंे गांधी की जगह भगत सिंह पूजे जाते?

    जिसने देकर प्राणों की बाजी
    भारत मां की लाज बचा दी।।
    PL REMUVE WORD VERIFICATION...FOR BETTER COMMENT..

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  2. I have removed that word verification as you suggested sir.

    यही तो इस देश का दुर्भाग्य है की जो सच में पूजने योग्य हैं उन्हें हम भूले बैठे हुए हैं और जिन्होंने सदा ही इस देश की पीठ पर छुरा भोका है वो सत्ता में रह कर फिर से देश की दुर्दशा कर रहे हैं

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  3. fir bhee gandhi mahan hai waha re mere desh ke logoo jagoo desh jagoo

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  4. यही तो इस देश की बिडम्बना है आनिल जी । मेरा उद्देश्य भी यही है कि लोगो तक बात पहुँचे । धन्यबाद अनिल जी ।

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  5. Gandhi ji isliye pooje jaate hai, kyu ki vo Congress ke brand embesder the, Jub tak gandhi ka naam hai congress ka naam bhi chamkega, aur Gandhi ko yehi dar tha ki unki itni umar beet jaane ke baad bhi jo naam vo nhi kama paaye vo bhagat sigh itni jadi kama liye, agar essa hua to Nehru ko kaun poochega. Isliye Gandhi ne bhagat singh ke marne mai he apni career ki bhalai samjhi, aur gandhi ne bhi kuch kam dedh ko barbaad nhi kiya, bus aazaadi ke baad 35 saal tak congress ne khul kar raaz kiya, aur apne brand embesder ko bahut popularity di...

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  6. अब ज्यादा दिन ना तो गाँधी चलने वाले हैं और ना ही ये काँग्रेस । सही कहा अतुल जी, गाँधी ने सिर्फ़ इस देश की भोली भली जनता का उपयोग किया अपना माहात्म्य बडाने के लिये, और नेहरू जैसे देशद्रोहियों ने उनका उपयोग किया सत्ता पाने के लिये । जागो देश जागो ।

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  7. mr morons if u can do something come on the stage ...actually u have no guts...to do something ..stupids indians thinkers who r saying these things...one day u will be under empire..again...u cant do nothing...u can not be like gandhi.. ji not like bhagat singh ajaad...they r the indians u r just morons...just morons

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  8. mr atul tum kyo nhi puje jaate..jo pujne layak ho unhi ko puja jata hai..bhagat singh bhi puje jaate haii,,,ye jo thinking leke bethe hooo..yhis is thing..u r not developed yet..this is thing...kuch bda nhi sochnaa.right...agr itni hi pdi hai..bhagat singh azaad or gandhi ji k bare me bolne ki to age aoo...sacrifice krke dikhaoo...hme bhi pta lgee..aap bdaa sochte ho desh k baare mee..jb dimag kmmm nhi krtaaa..to bdo ki bbaate nhiii krte..ust respect them both of them. -an indian scientist christson striver india.

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