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Wednesday, November 30, 2016

Why congress wants to remove General V.K Singh?


All of us know that corrupt babus & politicians have penetrated the defense forces and we saw the result in Adarsh Scam and Sukna land Scam. In Any defense contract middlemen gets paid upto 15-20% of the deal, So with around $36 billion dollar defence budget arnd $5 billion dollar is grabbed by these middlemen. Who are the middlemen, mostty they are congressemen. Let us find out the reason for this kolaveri di ..?

1. General V.K singh was in charge of investigating the Land Scams and other corruption and he exposed the babu nexus in Army.

2. He started cleaning the army after becoming General and withheld lot of defense contracts marred in corruption giving sleepless nights to the ministry of defense.

3. He has even prepared a roadmap for future so that Defense forces can get the best deals without any corruption that ministry of defense hates.

4. He has also been offered a governors post by congress if he resigns. That he had already refused.

5. Last and the most important reason. He had sent a letter of support to Anna Hazare during his fast on 5th April.

And now congress wants to install a general who will be a puppet in the hands of congress just like our Mauni Baba. May be they are scared of General because he is a roadblock if the government wants to bring emergency in near future.

If you want to read in detail go thru this link - चौथी दुनिया से एक और सच

देश के सर्वोच्च न्यायालय में सेना और सरकार आमने-सामने हैं. आज़ादी के बाद भारतीय सेना की यह सबसे शर्मनाक परीक्षा हैजिसमें थल सेनाध्यक्ष की संस्था को सरकार दाग़दार कर रही है. पहली बार सेनाध्यक्ष और सरकार के बीच विवाद का फैसला अदालत में होगा. विवाद भी ऐसाजिसे सुनकर दुनिया भर में भारत की हंसी उड़ रही है. यह मामला थल सेनाध्यक्ष जनरल विजय कुमार सिंह की जन्मतिथि का है. इस मामले में एक पीआईएल सुप्रीम कोर्ट के सामने है. वहां क्या होगायह पता नहींलेकिन इस विवाद को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा हैउसे समझना ज़रूरी है. सारे तथ्य और सबूत इस बात को साबित करते हैं कि जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1951 हैलेकिन सरकार ने इस तथ्य को ठुकरा दिया और उनकी जन्मतिथि 10 मई, 1950 मान ली. सरकार की इस ज़िद का राज़ क्या है. सरकार क्यों देश के सर्वोच्च सेनाधिकारी को बेइज़्ज़त करने पर तुली हैजबकि यह बात दिन के उजाले की तरह सा़फ है कि जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1951 है. साक्ष्य इतने पक्के हैं कि सुप्रीम कोर्ट के तीन-तीन भूतपूर्व चीफ जस्टिस ने अपनी राय जनरल वी के सिंह के पक्ष में दी है. इसके बावजूद अगर विवाद जारी है तो इसका मतलब है कि दाल में कुछ काला है.

1.  सरकार की नाराज़गी की कई वजहें हैं. भारतीय सेना एक ट्रक का इस्तेमाल करती हैजिसका नाम है टेट्रा ट्रक. भारतीय थलसेना टेट्रा ट्रक का इस्तेमाल मिसाइल लांचर की तैनाती और भारी-भरकम चीजों के ट्रांसपोर्टेशन में इस्तेमाल करती है. इन ट्रकों का पिछला ऑर्डर फरवरी, 2010 में दिया गया थालेकिन ख़रीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं तो आर्मी चीफ वी के सिंह ने इस सौदे पर मुहर लगाने से इंकार कर दिया.  भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड यानी बीईएमएल लिमिटेड को जिस व़क्त इन ट्रकों की आपूर्ति का ठेका मिलातब भारतीय सेना की कमान जनरल दीपक कपूर के हाथ में थी.

2. दरअसलबीईएमएल द्वारा टेट्रा ट्रकों की ख़रीद का पूरा मामला संदेह के घेरे में है. एक अंग्रेजी अख़बार डीएनए के मुताबिक़रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक दिए गए कुल ठेकों में भारी धनराशि बतौर रिश्वत दी गई है. डीएनए के मुताबिक़यह पूरा रैकेट 1997 से चल रहा है. बीईएमएल में उच्च पद पर रह चुके एक पूर्व अधिकारी के हवाले से यह भी ख़बर आई कि अभी तक कंपनी टेट्रा ट्रकों की डील से जुड़ा कुल 5,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार कर चुकी है. यह कारोबार टेट्रा सिपॉक्स (यूके) लिमिटेड के साथ किया गया है. इसे स्लोवाकिया की टेट्रा सिपॉक्स एएस की सब्सिडियरी बताया जाता रहा है. बीईएमएल के इस पूर्व अधिकारी के मुताबिक़, 5,000 करोड़ रुपये के इस कारोबार में 750 करोड़ रुपये बीईएमएल एवं रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को बतौर रिश्वत दिए गए.

3.  बीईएमएल के एक शेयरधारक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के एस पेरियास्वामी राष्ट्रपति के हस्तक्षेप और सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं. वह कहते हैंख़रीद के लिए जितनी रकम की मंजूरी दी जाती हैउसका कम से कम 15 फीसदी हिस्सा कमीशन में चला जाता है. ऊपर से नीचे तक सबको हिस्सा मिलता है. मैंने 2002 में कंपनी की एजीएम में यह मुद्दा उठाया थालेकिन इस पर चर्चा नहीं की गई. एक प्रतिष्ठित बिजनेस अख़बार ने यहां तक लिखा कि बीईएमएल की टेट्रा ट्रकों की डील को कारगर बनाने में जुटी हथियार विक्रेताओं की लॉबी ने आर्मी चीफ को आठ करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश भी की थीजिसे जनरल वी के सिंह ने ठुकरा दिया.

 अब सवाल यह उठता है कि क्या आर्मी चीफ पर इसलिए पद छोड़ने का दबाव हैक्योंकि उन्होंने टेट्रा डील पर दस्तख़त नहीं किए थेक्या बीईएमएल सेकेंड हैंड ट्रकों का आयात कर रही है और क्या स्लोवाकिया में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बंद हो गया हैक्या पुराने ट्रकों की मरम्मत को घरेलू उत्पादन के तौर पर दिखाया जा रहा हैरविंदर ऋषि कौन हैउसे इतने रक्षा सौदों का ठेका क्यों दिया जा रहा हैइस लॉबी के लिए सरकार में काम करने वाले लोग कौन हैंअगर सरकार इन सवालों का जवाब नहीं देती है तो इसका मतलब यही है कि आर्मी चीफ को ठिकाने लगाने के लिए मा़िफया और अधिकारियों ने मिलजुल कर जन्मतिथि का बहाना बनाया है.

4. जनरल वी के सिंह ने सेना के आधुनिकीकरण के लिए एक प्लान तैयार कियायह प्लान डिफेंस मिनिस्ट्री में लटका हुआ है. उन्होंने इस बीच कई ऐसे काम किएजिनसे आर्म्स डीलरों और बिचौलियों की नींद उड़ गई. सिंगापुर टेक्नोलॉजी से एक डील हुई थी. इस कंपनी की राइफल को टेस्ट किया गयाउसके बाद जनरल वी के सिंह ने रिपोर्ट दी कि यह राइफल भारत के लिए उपयुुक्त नहीं है. भारतीय सेना को नए और आधुनिक हथियारों की ज़रूरत है. इस ज़रूरत को देखते हुए वह अगले एक-दो सालों में भारी मात्रा में सैन्य शस्त्र और नए उपकरण ख़रीदने वाली है. ख़ासकरभारत इस साल भारी मात्रा में मॉडर्न असॉल्ट राइफलें ख़रीदने वाला है. भारत का सैन्य इतिहास यही बताता है कि आर्म्स डील के दौरान जमकर घूसखोरी और घपलेबाज़ी होती है. जनरल वी के सिंह सेना के अस्त्र-शस्त्रों की ख़रीददारी में पारदर्शिता लाना चाहते हैं. वह एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहते हैंजिसमें सैनिकों को दुनिया के सबसे आधुनिकतम हथियार मिलेंलेकिन कोई बिचौलिया न हो और न कहीं किसी को दलाली खाने का अवसर मिले

5. जबसे वह सेनाध्यक्ष बने हैंतबसे भारतीय सेना पर कोई घोटाले या भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा. भ्रष्टाचार के जो पुराने मामले थेउन्हें न स़िर्फ निपटाया गयाबल्कि उन्होंने आदर्श जैसे घोटाले की जांच में एजेंसियों की मदद की. आदर्श हाउसिंग सोसाइटी के ज़मीन घोटाले में जनरल वी के सिंह ने मुस्तैदी दिखाई. सेना की कोर्ट ऑफ इनक्वायरी का गठन कियाजिसमें दो पूर्व सेनाध्यक्षों-जनरल दीपक कपूर और जनरल एन सी विज सहित कई टॉप अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया. इन सबका नतीजा यह हुआ कि आर्म्स डीलरों की लॉबीअधिकारीज़मीन मा़िफया और ऐसे कई सारे लोग जनरल वी के सिंह के ख़िला़फ लामबंद हो गए और उनकी जन्मतिथि के विवाद को हवा दी.

6. जबसे वह सेनाध्यक्ष बने हैंतबसे भारतीय सेना पर कोई घोटाले या भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा. भ्रष्टाचार के जो पुराने मामले थेउन्हें न स़िर्फ निपटाया गयाबल्कि उन्होंने आदर्श जैसे घोटाले की जांच में एजेंसियों की मदद की. आदर्श हाउसिंग सोसाइटी के ज़मीन घोटाले में जनरल वी के सिंह ने मुस्तैदी दिखाई. सेना की कोर्ट ऑफ इनक्वायरी का गठन कियाजिसमें दो पूर्व सेनाध्यक्षों-जनरल दीपक कपूर और जनरल एन सी विज सहित कई टॉप अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया. इन सबका नतीजा यह हुआ कि आर्म्स डीलरों की लॉबीअधिकारीज़मीन मा़िफया और ऐसे कई सारे लोग जनरल वी के सिंह के ख़िला़फ लामबंद हो गए और उनकी जन्मतिथि के विवाद को हवा दी.

7. उन्होंने सेना में मीट की सप्लाई करने वाले मीट कारटेल का स़फाया कर दियावे लोग जो मीट सप्लाई करते थेवह ठीक नहीं था. जनरल वी के सिंह ने इसके लिए ग्लोबल टेंडर की शुरुआत कीताकि दुनिया का सबसे बेहतर मीट सेना के जवानों को मिले.

8. सेनाध्यक्ष बनते ही उन्होंने सेना में मौजूद भ्रष्टाचार और मा़िफया तंत्र को ख़त्म करना शुरू कर दिया. लगता हैयह बात नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में बैठे अधिकारियों को ख़राब लगी. देश में सरकारी तंत्र कैसे चल रहा हैयह एक स्कूली बच्चे को भी पता है. लगता हैदेश में जो ईमानदार और आदर्शवादी लोग हैंउनके लिए सरकारी तंत्र में कोई जगह नहीं रह गई है. उन्हें ईनाम मिलने की जगह सज़ा दी जाती है और जलील किया जाता है.

क्या इस देश में अलग-अलग नागरिकों के लिए अलग-अलग क़ानून हैं या फिर यह मान लिया जाए कि इस देश को मा़िफया सरगना और सरकार में बैठे उनके दलाल चला रहे हैं. पूरे देश की जनता एक ऐसे घिनौने वाक्ये से रूबरू हो रही हैजिसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि पिछले सात सालों में जिस तरह देश में संवैधानिक और राजनीतिक संस्थानों की बर्बादी हुई हैवैसी पहले कभी नहीं हुई. हैरानी की बात यह है कि सरकार एक तऱफ यह कह रही है कि थल सेनाध्यक्ष झूठ बोल रहे हैं और दूसरी तऱफ वह उनसे डील भी करती है कि उन्हें किसी देश का राजदूत या किसी राज्य का गवर्नर बना दिया जाएगा. यही नहींयह धमकी भी दी जा रही है कि अगर वह कोर्ट गए तो उन्हें सेनाध्यक्ष के पद से ब़र्खास्त कर दिया जाएगा.

इसलिए जनरल वी के सिंह को ख़ुद के लिए नहींबल्कि इस संस्था की गरिमा बचाने के लिए कोर्ट में जाना चाहिए. अगर वह नहीं गए तो इसका मतलब यही है कि देश के माफियाअधिकारी और नेता जब चाहेंगिरोह बनाकर भविष्य के सेनाध्यक्षों को नीचा दिखा सकते हैंउन्हें मनचाहा काम कराने के लिए मजबूर कर सकते हैं. जनरल वी के सिंह लड़ रहे हैंयह अच्छी बात है. हो सकता हैभविष्य में किसी दूसरे ईमानदार सेनाध्यक्ष के साथ फिर ऐसा होलेकिन वह जनरल वी के सिंह की तरह लड़ भी न सके.

Sunday, June 30, 2013

क्‍या आप इशरत जहां व उसके साथियों की सच्‍चाई जानते हैं? Who is Ishrat Jahan

मुसलमान वोट पाने और अपने घोर विरोधी व गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए केंद्र सरकार जिस तरह से मजहबी आतंकवादियों की पैरोकार बनी हुई है, वह इस देश के लिए बेहद घातक है। केंद्र सरकार की संचालक कांग्रेस ने अपने पिट्ठू मीडिया हाउसों व बुद्धिजीवियों को भी इसका ठेका दे दिया है कि वह लगातार झूठ बोल-बोल कर इशरत जहां को 'संत इशरत' और इंटेलिजेंस ब्‍यूरो(IB) व गुजरात पुलिस को हैवान साबित करे, भले ही इससे देश की सुरक्षा दांव पर लगती हो! कट्टरपंथी मुसलमानों को भी यह रास आ रहा है....आखिर यह इस्‍लामी आतंकवाद को सरकारी स्‍वीकार्यता जो प्रदान करता है! 

 
 
चलिए छोडि़ए, जरा उस इशरत जहां की पृष्‍ठभूमि पर गौर फरमा लें, जिसकी जिंदगी यूपीए सरकार, कांग्रेस पार्टी, तहलका व एनडीटीवी जैसे मीडिया हाउसों, सरकारी व अरब के फंड पर पलने वाले पालतू एनजीओ और अपने दिमाग को बेचकर पैसा कमाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों लिए 'अनमोल' बन चुकी है! 
1) गुजरात पुलिस के क्राइम ब्रांच ने 15 जून 2004 को एक मुठभेड़ में चार लोगों को मार गिराया था, जिनके नाम हैं- जीशन जौहर उर्फ अब्‍दुल गनी, अहमद अली उर्फ सलीम, जावेद गुलाम शेख उर्फ प्रनेश कुमार पिल्‍लई और इशरत जहां। आरोप है कि गुजरात पुलिस ने इन चारों को फर्जी मुठभेड़ में मारा था। वहीं गुजरात पुलिस का पक्ष था कि उन्‍हें आईबी से यह सूचना मिली थी कि ये चारों लश्‍कर-ए-तैयबा के आतंकी हैं और गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने आए थे। इसके अलावा ये लोग गुजरात में जगह-जगह आतंकी हमले को अंजाम देना चाहते थे।
2) बाद में मारे गए व्‍यक्तियों में दो- जीशन जौहर व अहमद अली की पहचान पाकिस्‍तानी नागरिक के रूप में हुई।
3) जीशन जौहर पाक अधिकृत कश्‍मीर से जम्‍मू-कश्‍मीर में घुसा था। वहीं, अमजद अली को लश्‍कर-ए-तैयबा ने गुजरात व महाराष्‍ट्र में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए सीधे पाकिस्‍तान से भारत के बॉर्डर में भेजा था।
4) तीसरा व्‍यक्ति जावेद उर्फ पिल्‍लई दुबई गया था, जहां लश्‍कर के प्रभाव में आकर उसने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया था और वह मुसलमान बन गया था।
5) लश्‍कर के इशारे पर जावेद व इशरत पति-पत्‍नी बनकर इत्र कारोबारी के रूप में भारत के अंदर भ्रमण करते थे ताकि किसी को उन पर शक न हो। दोनों ने साथ-साथ अहमदाबाद, लखनऊ व फैजाबाद जा कर महत्‍वपूर्ण स्‍थलों की रेकी की थी।
6) जो कांग्रेस संचालित यूपीए सरकार इशरत जहां को 'संत इशरत' साबित करने के लिए उसके फर्जी मुठभेड़ की थ्‍योरी गढ़ रही है, उसी केंद्र सरकार ने गुजरात हाईकोर्ट में यह हलफनामा दाखिल कर कहा था कि जावेद व इशरत आतंकवादी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा के सदस्‍य हैं।
7) 15 जून 2004 को इशरत सहित मुठभेड़ में चारों आतंकी मारे गए थे। उसके अगले ही दिन पाकिस्‍तान के लाहौर से प्रकाशित लश्‍कर-ए-तैयबा के मुख पत्र ' गजवा टाइम्‍स' ने मारे गए आतंकियों को शहीद करार देते हुए लिखा था कि भारतीय पुलिस ने लश्‍कर के चार सदस्‍यों को मार दिया। इसमें इशरत जहां का नाम भी शामिल था।
8) 24/11 को मुंबई हमले के मास्‍टर माइंड हेविड हेडली से पूछताछ के दौरान अमेरिका के एफबीआई को जो सूचना मिली थी, उसने उसे भारत सरकार से साझा किया था। अमेरिका द्वारा भारत सरकार को भेजे गए औपचारिक पत्र में लिखा था कि ' इशरत जहां आत्‍मघाती दस्‍ते की महिला सदस्‍य थी, जिसे लश्‍कर ने भर्ती किया था।' एफबीआई ने उस पत्र में लिखा था कि इस दस्‍ते की योजना गुजरात के सोमनाथ व अक्षरधाम मंदिर व महाराष्‍ट्र के सिद्धि विनायक मंदिर पर हमला करने की थी।
9) शुरू में केंद्रीय गृहमंत्रालय ने गुजरात पुलिस द्वारा मुठभेड़ के बाद पेश किए गए साक्ष्‍यों को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट में एक हलफनामा दिया था, जिसमें स्‍पष्‍ट तौर पर इशरत जहां को लश्‍कर का आतंकी बताया गया था। बाद में राजनीति करते हुए केंद्र सरकार पलट गई और इसे दूसरा ही रूप दे दिया।
10) आज आईबी यानी खुफिया विभाग के तत्‍कालीन संयुक्‍त निदेशक राजेंद्र कुमार को सीबीआई गिरफ्तार करने में जुटी है। सीबीआई का तर्क है कि राजेंद्र कुमार ने गलत सूचना देकर इशरत को मरवाया। यह भी आरोप है कि वह गुजरात पुलिस की कस्‍टडी में मौजूद इशरत को देखने भी गए थे और मुठभेड़ की सारी साजिश को अंजाम दिया था।
जबकि सच यह है कि आईबी केवल सूचनाओं को मॉनिटरिंग करने और उन्‍हें संबद्ध पक्ष को देने वाली एजेंसी है न कि कार्रवाई करने वाली एजेंसी। इसलिए आईबी के अधिकारी द्वारा किसी को मारने का आदेश देने की बात ही गलत है। लेकिन कुछ भी कर सकने में सक्षम कांग्रेस पार्टी व उसकी सरकार इशरत जहां के मुठभेड़ को गलत साबित करने के लिए आईबी के विरुद्ध सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है जबकि दोनों ही केंद्रीय एजेंसियां हैं।
11) लोगों को शायद पता नहीं है कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाली कांग्रेस व अरब फंडेड एनजीओ जमात के कहने पर इशरत की मां शमीमा कौसर ने केंद्र सरकार से यह मांग की थी कि इस मामले की जांच सीबीआई के अधिकारी सतीश वर्मा को दिया जाए। लश्‍कर के एक आत्‍मघाती महिला की मां के कहने पर किसी अधिकारी को पूरे मामले का जांच अधिकारी बनाया जाना ही केंद्र सरकार के प्रति संदेह पैदा करता है।
12) आईबी ने सीबीआई निदेशक को कहा है कि सीबीआई अधिकारी सतीश वर्मा व आईबी के तत्‍कालीन संयुक्‍त निदेशक राजेंद्र कुमार के बीच पुराने समय में बेहद कटु संबंध थे।
इसकी सूचना केंद्र सरकार को भी थी, लेकिन सरकार ने एक आरोपी आतंकी की मां की मांग पर अपनी के दो एजेंसियों की साख पर बट्टा लगा दिया।
13) हर तरफ फजीहत होता देख और आईबी के विरोध के बाद केंद्र सरकार ने उस जांच अधिकारी सतीश वर्मा को इस मामले की जांच से हटा दिया है, लेकिन तब तक आईबी व सीबीआई की फजीहत हो चुकी थी।
14) जिस आईबी के निदेशक का नाम इससे पहले कोई नहीं जानता था, आज एकमुश्‍त मुसलमान वोट के लिए यूपीए को दोबारा सत्‍ता में लाने की कांग्रेसी महत्‍वाकांक्षा में उनकी तस्‍वीर भी जनता के समक्ष आ चुकी है। इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने 'सोनिया जी के कारण ही एक मुसलमान को आईबी का निदेशक बनाया गया है'- जैसा घोर सांप्रदायिक बयान देकर आईबी निदेशक की पहचान पहले ही उजागर कर चुके हैं।
अब सवाल उठता है कि आखिर इस देश के राजनीतिज्ञ कब तक मुसलमानों को इंसान से अधिक एक वोट बैंक मानकर चलते रहेंगे? कब तक चरमपंथी मुसलमान राष्‍ट्र राज्‍य से अधिक इस्‍लामी राज्‍य की स्‍थापना के लिए निर्दोष लोगों को आतंक का शिकार बनाते रहेंगे? इस्‍लामी चरमपंथियों को 'संत' साबित करने की कोशिश आखिर कब तक चलती रहेगी? कब तक मानवाधिकार के नाम पर मीडिया-एनजीओ-बुद्धिजीवियों की जमात आतंकियों के पक्ष में और पुलिस-सेना के विरोध में खड़ी होती रहेगी? और कब तक इस देश के नागरिक इशरत जहां जैसों की पृष्‍ठभूमि को जानकर भी उसके नाम पर चलने वाली राजनीति को खामोश रहकर बर्दाश्‍त करते रहेंगे?....आखिर कब तक ये सब चलता रहेगा?....कब तक....?

-- Sandeep Dev
http://www.aadhiabadi.com/positive-interference/vichar-vimarsh/741-who-was-ishrat-jahan


Friday, February 1, 2013

समझौता एक्सप्रेस बम धमाके का सच

अभी कुछ ही दिन पहले यहाँ साध्वी प्रज्ञा सिंह जी की एक चिट्ठी आप लोगो को दिखाई थी, ये बताने के लिए की उन्हें किस तरह समझौता एक्सप्रेस बम धमाके में फसाया गया। ये कुछ तथ्य और हाथ लगें हैं प्रस्तुत हैं –

United Nations Security Council says LeT and other islamic organizations were involved in Samjhaouta express bomb blast, then why Indian home minister saying its RSS and BJP or Hindu Terror links ??
Please see yourself and think over the dangerous design of Congress to destroy India from within.
Truth of Samjhauta Express Bomb Blast

अगर साध्वी प्रज्ञा अपराधी हैं तो उनके अपराध को सबके सम्मुख क्यों नहीं रखा जाता ? उन्हें इसकी सजा क्यों नहीं दी जाती ? उन पर केवल अत्याचार ही क्यों हो रहा है ?

Truth of Samjhauta Express Bomb Blast

उन्हें प्रताणित किया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस की नपुंसक सरकार अपने तथाकथित सेक्युलर राजनीती और मत्रियों के बेसिरपैर के "भगवा आतंकवाद" सम्बन्धी बयानों को पुष्ट कर, भारत को तोड़ने की साजिश में लगी हुयी है। उन्हें भगवा वस्त्र पहनने का दंड मिल रहा है, एक हिन्दू होने का दंड मिल रहा है।

जागो भारत जागो, और जागने के लिए सच जानना बहुत जरुरी है। ये उसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु उठाया गया कदम है। जय हिन्द।

Saturday, June 11, 2011

Facts about Jawahar Lal Nehru - 7 : Reality of Soniya Gandhi


Dr. Subramanian Swamy writes that Sonia Gandhi’s name was Antonia Maino. Her father was a Mason. He was an activist of the notorious fascist regime of Italy and he served five years imprisonment in Russia. Sonia Gandhi has not studied beyond high school. She learnt some English from an English teaching shop named Lennox School at the Cambridge University campus. From this fact she boasts of having studied at the prestigious Cambridge University. After learning some English, she was a waitress at a restaurant in Cambridge town.
Sonia Gandhi had intense friendship with Madhavrao Scindia in the UK, which continued even after her marriage. One night at 2 AM in 1982, Madhavrao Scindia and Sonia Gandhi were caught alone together when their car met an accident near IIT Delhi main gate.
When Indira Gandhi and Rajiv Gandhi were Prime Ministers, PM’s security used to go to New Delhi and Chennai international airports to send crates of Indian treasures like temple sculptures, antiques, paintings etc to Rome. Arjun Singh as CM and later as Union Minister in charge of Culture used to organize the plunder. Unchecked by customs, they were transported to Italy to be sold in two shops named Etnica & Ganpati, owned by Sonia Gandhi’s sister Alessandra Maino Vinci.
[Consipiracy] Indira Gandhi died not because her heart or brain was pierced by bullets, but she died of loss of blood. After Indira Gandhi was fired upon, Sonia Gandhi strangely insisted that bleeding Indira Gandhi should be taken to Dr. Ram Manohar Lohia Hospital, in opposite direction to AIIMS which had a contingency protocol to precisely deal with such events. After reaching Dr. Ram Manohar Lohia Hospital, Sonia Gandhi changed her mind and demand that Indira Gandhi should be taken to AIIMS, thus wasting 24 valuable minutes. It is doubtful whether it was immaturity of Sonia Gandhi or a trick to speedily bring her husband to power.
Rajesh Pilot and Madhav Rao Scindia were strong contenders to the Prime Minister’s post and they were road blocks in Sonia Gandhi’s way to power. Both of them died in mysterious accidents.
There are circumstantial evidences pointing to the prima facie possibility that the Maino family have contracted LTTE to kill Rajiv Gandhi. Nowadays, Sonia Gandhi is quite unabashed in having political alliance with those like MDMK, PMK and DMK who praise Rajiv Gandhi’s killers. No Indian widow would ever do that. Such circumstances are many, and raise a doubt. An investigation into Sonia’s involvement in Rajiv’s assassination is necessary. You may read Dr. Subramanian Swamy’s book “Assassination Of Rajiv Gandhi — Unasked Questions and Unanswered Queries” (ISBN: 81-220-0591-8). It contains indications of such conspiracy.

                         With Thanks From: Nehru Gandhi dynasty

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